XA-6, Sah Vikas Apartment, I.P.Extension, Patparganj, Delhi, 110092
Call us : +91-7065003166
Mail us : youth4swaraj@gmail.com


Major Campaigns Hamara Safar

The path thus trodden in our pursuit of swaraj. Listen to the clarion call and make the shift.

  • Lead Person

    Rishav Ranjan

  • Phone


  • Email


Shiksha Rozgaar Andolan

Youth For Swaraj is striving for alternative politics in various ways. One of those ways is to expose corruption in exams through political discourse and movement. Our team has pursued the campaigns for students of various fields. Standing for corruption in DSSSB exam, CSAT exam, G.B.Pant Engg College infrastructure etc. We had been an important part of #OccupyUGC movement. Our National Convention of ‘Shiksha Swaraj’ has focused on the need of educational reforms. We stand firm against ‘privatization’ of educational institutions and fund cuts in scholarships programs. We demand ‘education’ to be an important and significant part of our national budget. Currently we are trying to unite all victims of exam corruption like SSC, MPSC, BPSC and other state exams. We are providing them a common platform for addressing their issue in an organized way. We want to establish the real issues of ‘unemployment’ and ‘education’ in our national agenda.

मैं भी किसान की संतान

“What counts in life is not the mere fact that we have lived. It is what difference we have made to the lives of others that will determine the significance of the life we lead.” ~Nelson Mandela

Youth for Swaraj of Swaraj Abhiyan calls upon the privileged section of the society to come forward and be the voice of the farmers who have been denied the privilege of a debt-free life, the privilege of fair prices that they deserve for the hard work they put into farming.

In today’s times, our country is going through a major agricultural crisis with farmers submerged in debt. This crisis has reached such a level that everyday the news of farmers committing suicide comes from one part of the country or other. Farmers are living in such trying times that farmers who are feeding the nation are unable to feed their own families. And when they fail to pay their debts, they are subjected to such cruel defamation that they give up their lives.

Farmers have not only suffered during natural calamities like drought; After suffering from drought for two years, when the farmers witnessed a good yield this year, they are again faced with a situation where they are suffering from heavy loses. Added to this is the fact that on most occasions, the government has failed to purchase the crops that farmers have produced. The Kisan Mukti Yatra undertaken by nearly 184 farmers organization is on a country wide tour to reach out to distressed farmers and give them a collective voice. The Kisan Mukti Yatra is highlighting the failures of promises of the government at such times. This farmers movement has emerged as a ray of hope for the country and to keep this hope alive, the farmers need your support.

This fight is not just for saving farmers or farming. This is the fight of every citizen, every youth of this country. It is only when farmers and farming will survive that the country’s villages will be able to sustain. And only when the villages will be able to sustain, the cities can survive. And this inter-dependency makes this farmers’ fight a fight of every citizen in this country

Youth for Swaraj is running a campaign named “मैं भी किसान की संतान (बळीराजाच्यामुला)”. This campaign is an initiative to gather the voices and energy of the youth for the cause of farmers of this country. Through the Facebook Online Event “मैं भी किसान की संतान” campaign, thousands of youth have engaged with it. The youth of Delhi & across the country have taken an oath to not let the farmers commit suicide and have offered their support to the farmers’ movement.

We urge you to extend your support and be the voice of our farmers for “It takes each of us to make a difference for all of us “

‘मेरा गड्ढा सबसे वड्डा’ : My Pothole My Pride

An initiative to bring the attention of the government to the situation of roads in Chandigarh

Panchkula unit of Y4S initiated a unique drive “My Pothole, My Pride” in the city to highlight apathy of the administration to the pathetic state of city roads. The roads were marked by countless potholes that were a cause of accidents on a regular basis. Y4S volunteers started marking these potholes with chalk powder everyday as they drew smileys, figures, wrote slogans. The drive received appreciation not only from the city residents but also from the media. The drive also held a competition “My Pothole The Biggest – mera gaddha, sabse vadda”, and finally winners of this competition were announced.

The drive finally forced the administration to take note and finally the roads in the city are being constructed.

कर्मचारी अधिकार संघर्ष!
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय

यूथ फ़ॉर स्वराज (Y4S) ने बीएचयू में दैनिक कर्मचारियों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ 171 दिनों की लंबी लड़ाई लड़ी, अंतत: मिली जीत।

बीएचयू में काम कर रहे दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ यूथ फ़ॉर स्वराज (Y4S) के साथियों ने संघर्ष किया। पिछले तीन दशक से परिसर में काम करने वाले इन कर्मचारियों को विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्थायी कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया था। नौकरी स्थायी करने की उनकी माँग को हमेशा अनसुना किया गया। लेकिन साथियों ने हार नहीं मानी और सबने मिलकर एक लंबी लड़ाई लड़ी।

कर्मचारियों का यह संघर्ष 171 दिनों तक चला जिसमें हड़ताल, अनशन, पत्राचार, बातचीत, विरोध प्रदर्शन सबकुछ हुआ। अनशन के दौरान कर्मचारियों की तबीयत खराब हुई, हाथ-पाँव फूल गये और कुछ कर्मचारियों को अस्पताल में भी भर्ती कराना पड़ा, फिर भी प्रशासन मूक दर्शक बना रहा। 30 दिनों तक प्रदर्शनकारियों ने आमरण अनशन भी किया। आमरण अनशन के पश्चात भी जब प्रशासन की तरफ से कोई सुनवाई नहीं हुई तब कर्मचारियों ने महामहिम राष्ट्रपति को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी।

स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेन्द्र यादव ने बीएचयू के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को स्थायी करने की मांग के साथ अनशन पर बैठे कर्मचारियों के संबंध में बनारस के सांसद श्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भी लिखा। कर्मचारियों के साथ मिलकर यूथ फ़ॉर स्वराज के साथियों ने कई प्रयास किए। कभी प्रतिरोध मार्च निकला तो कभी मंत्रियों से मिले। महेश शर्मा, महेंद्रनाथ पाण्डेय और अनुप्रिय पटेल से भी छात्र मिले पर आश्वासन के सिवाय कुछ हाथ नहीं लगा। बीएचयू के उपकुलपति जीसी त्रिपाठी से भी छात्रों ने मुलाकात की। उन्होंने कहा की उसका हल निकल जाएगा और कर्मचारियों से कहा की अगले दिन से वे अपने काम पे लग जाएँ। लेकिन अगले दिन जब कर्मचारी काम पर गए तो उन्हें भगा दिया गया और कहा गया की उन्हें काम से निकाल दिया गया है। जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखा गया, सबसे बात हुई।

प्रधानमंत्री मोदी की वाराणसी यात्रा के एक दिन पहले आधी रात को सारे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। लेकिन संघर्ष जारी रहा। किसी ने हार नहीं मानी।

आख़िरकार विश्वविद्यालय प्रशासन होश में आया। दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों की सुविधा देने की बात स्वीकार हुई और उन्हें तुरंत काम पर लौटने को कहा गया। यह बीएचयू के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों और यूथ फ़ॉर स्वराज (Y4S) के साथियों की बड़ी जीत है।

Job चाहिए, Jumla नहीं!

ज़्यादातर युवाओं का सपना होता है कि पढ़ लिखकर एक अच्छी सी नौकरी मिल जाए ताकि अपने घर परिवार को अच्छे दिन और ख़ुशहाल जीवन दे सकें! क्या आप अपने माँ बाप के अरमानों को पूरा करना और देश के विकास में योगदान देना चाहते हैं लेकिन अवसरों की कमी और चयन प्रक्रिया में धांधली का शिकार हो रहे हैं? क्या सिस्टम और सरकार की नाकामी के कारण आप सफ़ल नहीं हो पा रहे? क्या एक नौकरी के लिए आपको आंदोलन से लेकर अदालत तक तरह तरह के संघर्ष करने पड़ रहे हैं? क्या भ्रष्ट लोग आगे निकल जा रहे हैं और ईमानदार छात्र सिस्टम की मार झेलकर पीछे रह जा रहा है? क्या आज मेहनत या मेरिट की बजाए पैसे और पैरवी से नौकरी मिल रही है?

अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि ऊपर के सभी सवालों का जवाब अगर “हाँ” में है तो आप क्या कर रहे हैं?

ऐसे में तीन काम किए जा सकते थे:

*  अपनी क़िस्मत का रोना रोकर ये कहते हुए घर बैठ जाएं कि “ऐसा ही होता है, सब चलता है!”

*  हाथ पर हाथ रख कर उस दिन का इंतज़ार करें जब सरकार को सद्बुद्धि आए या फिर

*  युवाओं की ऊर्जा, ताकत और एकजुटता में भरोसा करते हुए बदलाव लाएं और अपना ही नहीं, देश का भविष्य भी उज्ज्वल बनाएं

सही मायने में युवा वही कहलाता है जो ग़लत के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाकर देश समाज में सकारात्मक बदलाव लाए। इसलिए युवा-हल्लाबोल ने तीसरे ऑप्शन को चुना और देश के कोने-कोने से ऊर्जावान युवाओं को एकजुट करके लड़ने का निर्णय लिया है। आपने क्या तय किया है? राष्ट्रनिर्माण के इस आंदोलन का हिस्सा बन रहे हैं न?

आज की कड़वी सच्चाई ये है कि एसएससी, यूपीएससी, रेलवे भर्ती, शिक्षक, सिपाही भर्ती से लेकर अलग अलग राज्यों के चयन आयोगों तक हर जगह बेरोज़गार युवाओं को छला जा रहा है। सरकारी विभागों में ही कम से कम 24,00,000 पद खाली पड़े हैं। लेकिन नौकरियां निकालने की बजाए सरकार पदों को ख़त्म कर रही है। नौकरी का विज्ञापन आ भी जाए तो परीक्षा करवाने में ही सालों साल लगा दिए जाते हैं। अगर परीक्षा हो तो पेपर लीक की घटनाएं इतनी आम हो गयी हैं कि मीडिया में इनकी ख़बर भी नहीं बनती। लगभग हर भर्ती परीक्षा में छात्रों को नेताओं, अफ़सरों, मीडियावालों और वकीलों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। क़िस्मत से परीक्षा होकर यदि परिणाम आ जाए तो फिर नियुक्ति देने में भी बेमतलब देरी की जाती है। और इतना कुछ होने के बाद युवा अगर लोकतांत्रिक ढंग से प्रदर्शन करे तो यह असंवेदनशील सरकार न ही सुनती है न ही संवाद करती है। अगर कुछ करती भी है तो जॉब मांगने वालों को लाठी डंडे और तरह तरह के जुमले देती है। सिस्टम के इसी रवैय्ये से पीड़ित युवाओं द्वारा अब आत्महत्या की दुखद ख़बरें भी आने लगी हैं।

ऐसे में युवा-हल्लाबोल आंदोलन ने स्पष्ट तौर पर कह दिया है कि युवाओं को “जॉब चाहिए, जुमला नहीं!” हम बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ सिर्फ़ शोर नहीं मचा रहे, बल्कि समस्या के समाधान के लिए सकारात्मक सुझाव भी दे रहे हैं। हमने सरकार को सभी युवा समूहों की मांगों से अवगत कराया है। रोज़गार के अवसर और ईमानदार परीक्षा प्रणाली के अलावा हमने एक “मॉडल कोड” भी बनाया है जिसके जरिए कोई भी भर्ती प्रक्रिया 9 महीने में पूरी हो सकती है। युवा-हल्लाबोला का कहना है “मॉडल कोड लागू करो, 9 महीने में नौकरी दो!”

इन्हीं मांगों को लेकर भारत की युवा आबादी बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ एकजुट हो गयी है। लेकिन यह राष्ट्रीय युवा एकता आपके समर्थन और साथ के बिना अधूरी है। राष्ट्रनिर्माण और युवाओं के भविष्य निर्माण की इस मुहिम का हिस्सा बनिए.. युवा-हल्लाबोल आंदोलन से जुड़िए..

Like Us On Facebook

Follow Us On Twitter

Follow Us On Instagram

Subscribe Us On Youtube